Monday, 22 January 2018

मस्तानी/ Mastani

बदलता समाज व बोल्ड होती लड़की का एक नमूना..मस्तानी


Image source : https://www.creativeboom.com


मस्तानी खूबसूरत थी मगर उससे भी खूबसूरत उसे अपने सपने लगते थे। जब जो चीज उसे भाता, बोल उठती व उसे पूरा करने के लिए कोई भी रास्ता अपनाना बुरा नहीं लगता था। तेज थी, महत्वाकांक्षी तो मेहनत से भी जी नहीं चुराती, फलस्वरूप वह पढाई अच्छे नम्बर से पास कर ली और जल्दी ही उसे एक ढंग की नौकरी भी मिल गयी। 

अब तो उसके पंख लग गये कि अपने शौक पूरा करने का साधन भी उसके लिए आसान हो गया। बस कमी थी एक ब्वॉय फ्रेंड की, किंतु जवान होने के बावजूद कोई उसके अलग स्वभाव होने की वजह से प्रपोज ही नहीं करता था। तब क्या वह कुंवारी रहती, नहीं.. मगर इसकी शुरुआत कैसे हो, यह समझ नहीं आता था।

जैसे-तैसे समय गुजरता जा रहा था। उसकी इच्छा तब और बढ गयी जब उसके साथ की अंतिम लड़की को भी ब्वॉय फ्रेंड मिल गया। वह उसके साथ घूमती और उसकी बातें, आनंद को चटकारे लगाकर बतलाती।

अब तो उसे और जलन होने लगी और उसने ब्वॉय फ्रेंड पटाने को लेकर ज्ञान के विभिन्न तरीकों के बारे में खोज करने का निर्णय किया ताकि कोई ढंग का लड़का उसके जीवन में भी आये। बावजूद उसे खास जानकारी नहीं मिली मगर इस खोज के दौरान उसे पुनः यह ज्ञान परिपक्व हो गया कि बुद्धिमान व्यक्ति अपनी खुशी के लिए स्वयं प्रयास करता है। इस ज्ञान का आधार बना यह तथ्य कि पहले जमाने में बुद्धिमान व राजकुमारियां स्वयंवर के जरिए अपना वर चुनती थी। उसने यहीं करने का निर्णय किया। अब वह जहां भी जाती,  नजरें उठाकर लड़कों के समूह को देखती, ताकि कोई ढंग का मनभावन लड़का उसकी आंखों को जंच जाय। 

काफी समय से मस्तानी की यह खोज जारी थी मगर असफल रही, उसे  कोई जंचता ही नहीं था। 

एक बार उसकी गाड़ी खराब हो गयी और उसने मेट्रो से सफर करने का निर्णय लिया। वहाँ की भीड़ देख पहले तो वह अचकचा गयी मगर फिर खुश हुई कि इसी बहाने उसे यहाँ भांति भांति के लड़के देखने का स्कोप मिलेगा। वह जिस bogy में चढी, अंदर आते ही उसकी आंखें जैसे ठहर गयी। उस bogy में एक स्मार्ट लड़का दिखा, भोली सूरत व अपने में ही खोया हुआ।

जरा देर तक मस्तानी उसके तरफ देखती रही, मगर उस लड़के ने पलटकर देखा नहीं । मेट्रो अपने रफ्तार से बढ रही थी, उसे लगा कि अब भी नहीं अपनी इच्छा इसे जतायी तो कहीं ये हाथ से न निकल जाय। फिर उस लड़का में कुछ ऐसा चुंबकत्व था कि उसका मन किया कि उसे छू ले, उसमें बंध जाए।

मस्तानी उस लड़के के पास आई व बिना दर्शकों का फिकर किए उस लड़के का गाल प्यार से छू लिया। इस हरकत को देख लड़का का ध्यान बंटा और नाराज होते हुए बोला, " ये क्या बदतमीजी है? आपके घर में बाप-भाई नहीं है क्या?"

लड़का के इस कथन पर मेट्रो के अन्य सहयात्री भी खिलखिलाकर हंसने लगे व सोचने लगे कि लड़का कितना संस्कारी है मगर इस हंसी से लड़की पीछे नहीं हटी और बड़े प्यार से जवाब दिया, " अजी बाप भी है, भाय भी बस प्रेमी नहीं है तो..। इसे सुनकर लड़का शरमा गया। मस्तानी समझ गयी कि जरा और कोशिश करने से मेरी बात बन सकती है तो वह आगे बढकर जरा और पास आते हुए धीरे से बोली, "क्या मेरे साथ...करोगे...?"

#कुलीना कुमारी, 22-1-2018

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