Wednesday, 2 November 2016

बिटिया


मेरी लाडो, मेरी बिटिया
तुम्हें किसी से डर नहीं हो
तू वो ज्योत बन

तू अपने आप से घिन नहीं कर
लड़की होने पे भाव हीन नहीं कर
तेरा है शरीर बस तेरे मन का
कोई अनजान तुमको छू न सके
तू वो रूप बन

पोंछ ले तू अपने आंसू
बड़ी दूर मंजिल, अभी काहे ठहरी
बुरे ही नहीं, अच्छे लोग भी यहां
कानून व्यवस्था भी, मददगार भी यहां
जब भी जरूरत तू आवाज दें
हर मुसीबत से तू लड़ सकें
तू वो हिम्मत बन..

मैं कमजोर अम्मा कहलाना न चाहूं
न चाहूं तू डर के घर में कैद हो
दोषियों को तू माफी न दे
न चाहूं निर्दोष नजरबंद हो
तू नापाक कदम को बढने न दें
जो मजबूर करे तू उन्हें तोड़ दें
दुश्मनों पे तू टूट सकें
तू वो तेज बन...

जो डरते हैं उसको डराते हैं लोग
कमजोर दिखाओगी तो फायदा उठाते हैं लोग
मजबूती का दामन तू खुद में थाम ले
अपने सपनों का लाडो तू पंख ओढ ले
कोई तुम्हें कुचल न सकें
तुम तक पहुँच न सकें
तू वो ऊंचाई बन...
-कुलीना कुमारी, 25-10-2016

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