Wednesday, 2 November 2016

प्रिये




तुम
कितने प्रिये हो
दर्द से तड़प रही हूं
शारीरिक अवस्था की वजह से
मगर दवा नहीं
इस हालत में भी
मुझे तुम चाहिए
तेरा साथ
तेरा प्यार
तेरी छुअन
तेरे बगल में लेटने का एहसास

होता है मन में
तुम छुओगे मुझे
मेरे सर पे हाथ रखोगे
अपने मजबूत बाहों में समा लोगे
तो इसी के साथ
मेरी सारी पीड़ाएं भी गुम हो जाएंगी
और बस जाएगा
फिर से मेरे अंदर ताजगी
संतोष, संतुष्टि और तृप्ति का भाव
और हो जाऊंगी मैं फिर से संपूर्ण

-कुलीना कुमारी, 1-11-2016

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