Sunday, 8 January 2017

हां जानम तुम..


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हां जानम तुम
अच्छे नहीं हो
तुम बेवफा हो
दिल के सच्चे नहीं हो

मेरी आवाज तुम सुनते ही नहीं
मेरा ख्याल तुम रखते ही नहीं
अपना प्यार तुम निभाते ही नहीं
तुम बात के पक्के नहीं हो

तड़पता है मेरा दिल
तुमको महसूस नहीं होता
धड़कता है मेरा दिल
तेरा यौवन नहीं भड़कता

मेरा मचले हैं तन-मन
तड़पे हैं अंग-अंग
तुम प्यास मेरी नहीं बुझाते
तुम जोशीले नहीं हो
हां जानम तुम..

मेरे में जो कमजोरी
वो तेरी देन है
अपना नशा लगा खुराक नहीं पहुंचाये
तो क्षमता मौन है

तुम्हें मिलकर चलना नहीं आए
सबको खुश रखना नहीं आए
तुम अपनी ताकत मुझे नहीं पहुंचाय
तुम अच्छा दिलदार नहीं हो
हां जानम तुम..

मुझे इतना प्यार करो
मेरे दिल को चैन आ जाय
मेरा जीभर जाय
मेेरे जिस्म को करार आ जाय

मैं बुलाऊं तुम आते ही नहीं
अपने गले लगा प्यार जताते ही नहीं
तुम पत्थर दिल
मेरे संग सोते नहीं हो
हां जानम तुम...

-कुलीना कुमारी, 8-1-2017

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