Sunday, 1 January 2017

मुस्कान, Smile



जिन्होंने मेरे गालों की लाली
मुस्कान बख्शी है
हो रब्बा उनका साथ बनाए रखना
प्यार बनाए रखना
हर वरष में हर युग में

जिन्होंने चलने का जोश दिया
जीने की वजह बख्शी है
हो रब्बा उनका भाव बनाए रखना
ऐतवार बनाए रखना
हर वरष में हर युग में

मैं गिरने लगूं तो
मेरे अपने मुझे सम्हाले
भटकने लगूं तो
गुरूजन राह दिखाए
हर सुख-दुख में साथ मिले अपनों का
तो जीवन होता जाए सहज
हर वरष में हर युग में..

कुछ ऐसे भी मेरे साथी हैं
जो मुझको पढ़ना जानते हैं
मैं क्या कहूं समझते हैं
मुझको परखना जानते हैं
आलोचना-समालोचना के मंजर में
निखरता जाए मेरा व्यक्त्वि निरंतर
हर वरष में हर युग में..

मेरा मरद मेरा प्रेमी
मेरी जरुरत वह समझता है
मैं क्या चाहूं जानता है
अपनी ताकत मुझमें भरता है
उनसे जुड़कर संपूर्णता पाती रहूं
आनन्द मैं भोगती रहूं
हर वरष में हर युग में..

कितना कुछ दिया देश और समाज ने
हम अपना भी कुछ देते जाए
सुख क्या है, उन्हें बताए
अच्छाइयां हम बांटते जाए
अरमान और फर्ज के मिश्रण संग
ढलता जाए जीवन का पल-पल
हर वरष में हर युग में

-कुलीना कुमारी, 1-1-2017

No comments:

Post a Comment

Search here...

Follow by Email

Contact Us

Name

Email *

Message *